टीएमबीयू के 10 प्रखंड स्तरीय डिग्री कॉलेजों में जल्द होगी शिक्षकों की तैनाती काउंसिलिंग प्रक्रिया हुई पूरी, योगदान के दौरान जरूरी दस्तावेजों की सूची जारी
भागलपुर: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) के अधिकार क्षेत्र में आने वाले 10 प्रखंड स्तरीय अंगीभूत और संबद्ध डिग्री कॉलेजों में पठन-पाठन को पटरी पर लाने और योग्य शिक्षकों की कमी को दूर करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इन कॉलेजों में शिक्षकों की तैनाती की प्रक्रिया को अब अंतिम चरण में पहुंचा दिया गया है। इसके तहत नवनियुक्त या चयनित शिक्षकों की काउंसिलिंग प्रक्रिया सोमवार को पूरी कर ली गई है। काउंसिलिंग संपन्न होने के बाद अब विश्वविद्यालय की ओर से जल्द ही इन शिक्षकों की तैनाती (Posting) के लिए आधिकारिक अधिसूचना (Notification) जारी की जाएगी। इस पहल से वर्षों से शिक्षकों के अभाव से जूझ रहे ग्रामीण इलाकों के इन कॉलेजों में उच्च शिक्षा की स्थिति सुधरने की प्रबल उम्मीद बंध गई है।
टीएएमबीयू प्रशासन द्वारा प्रदेश सरकार के दिशा-निर्देशों और विश्वविद्यालय नियमों के तहत प्रखंड स्तर पर खुले नए डिग्री कॉलेजों में शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया शुरू की गई थी:
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की परिकल्पना: राज्य सरकार की मंशा है कि ग्रामीण और दूर-दराज के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए जिला मुख्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए प्रखंड स्तर पर डिग्री कॉलेज खोले गए हैं।
शिक्षकों का टोटा हुआ दूर: इन कॉलेजों में लंबे समय से शिक्षकों के पद खाली पड़े थे, जिसके कारण कक्षाओं का संचालन नियमित रूप से नहीं हो पा रहा था। इस नई शिक्षक तैनाती प्रक्रिया के पूरा होने से अब कॉलेजों को विषयवार योग्य शिक्षक मिल सकेंगे।
सोमवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुई काउंसिलिंग
चयनित उम्मीदवारों के दस्तावेजों के सत्यापन और उनकी पात्रता की जांच के लिए विश्वविद्यालय परिसर में सोमवार को विशेष काउंसिलिंग सत्र आयोजित किया गया:
दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच: विश्वविद्यालय के संबंधित अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों की देखरेख में अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाण पत्र, मूल अंकपत्र, स्नातकोत्तर (Post Graduation) और नेट/पीएचडी (NET/PhD) से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच की गई।
उम्मीदवारों की उपस्थिति: काउंसिलिंग प्रक्रिया में भाग लेने के लिए सुबह से ही दूर-दराज से पहुंचे अभ्यर्थियों की लंबी कतारें विश्वविद्यालय मुख्यालय में देखी गईं। सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद योग्य पाए गए अभ्यर्थियों की अंतिम सूची तैयार कर ली गई है।
योगदान के समय जरूरी दस्तावेजों के निर्देश जारी
विश्वविद्यालय प्रशासन ने चयनित शिक्षकों को कॉलेज आवंटन के उपरांत योगदान (Joining) के समय प्रस्तुत किए जाने वाले आवश्यक दस्तावेजों और दिशा-निर्देशों की सूची भी स्पष्ट कर दिया है:
मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र: मैट्रिक, इंटरमीडिएट, स्नातक, स्नातकोत्तर और नेट/स्लेट/पीएचडी की मूल डिग्रियां और अंकपत्र।
पहचान पत्र और पते का प्रमाण: आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी कार्ड की स्व-अभिप्रमाणित प्रतियां।
जाति एवं अन्य प्रमाण पत्र: यदि लागू हो तो सक्षम प्राधिकार द्वारा निर्गत जाति प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस (EWS) प्रमाण पत्र या दिव्यांगता प्रमाण पत्र।
चिकित्सा फिटनेस प्रमाण पत्र (Medical Fitness Certificate): सिविल सर्जन द्वारा प्रदत्त स्वास्थ्य प्रमाण पत्र।
चरित्र प्रमाण पत्र (Character Certificate): राजपत्रित अधिकारी द्वारा जारी किया गया हालिया चरित्र प्रमाण पत्र और पासपोर्ट साइज रंगीन फोटोग्राफ।
छात्रों और अभिभावकों में जगी उम्मीद की किरण
इन 10 प्रखंड स्तरीय कॉलेजों में शिक्षकों की तैनाती की खबर से छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों में भारी उत्साह है:
नियमित कक्षाओं का संचालन: स्थानीय छात्रों का कहना है कि शिक्षक न होने के कारण उनका सत्र पिछड़ रहा था और पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा था। अब नए शिक्षकों के आने से नियमित रूप से कक्षाएं चल सकेंगी।
क्षेत्रीय विकास: ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा का प्रसार होने से स्थानीय युवाओं को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
अगला कदम: अधिसूचना और कॉलेज आवंटन
काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब सभी की निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी होने वाली अंतिम अधिसूचना पर टिकी हैं:
जल्द जारी होगी अधिसूचना: प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, एक-दो दिनों के भीतर चयनित शिक्षकों के नाम और उनके आवंटित कॉलेजों की सूची के साथ आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।
समयसीमा के भीतर योगदान: अधिसूचना जारी होने के बाद शिक्षकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने-अपने आवंटित कॉलेजों में जाकर योगदान देना होगा, जिसके तुरंत बाद वहां शैक्षणिक सत्र पूरी ऊर्जा के साथ शुरू हो जाएगा।
टीएमबीयू के 10 प्रखंड स्तरीय डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों की तैनाती की दिशा में उठाया गया यह कदम विश्वविद्यालय के शैक्षणिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। काउंसिलिंग का सफलतापूर्वक पूरा होना और योगदान से जुड़े दिशा-निर्देशों का जारी होना इस बात का प्रमाण है कि विश्वविद्यालय प्रशासन शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर गंभीर है। अब देखना यह है कि अधिसूचना जारी होने के बाद कितनी जल्दी ये शिक्षक अपने कार्यभार को संभालते हैं और ग्रामीण छात्रों के भविष्य को संवारने में अपनी भूमिका निभाते हैं।