ध्रुबगंज और राघोपुर पंचायत में आयोजित सहयोग शिविर में मात्र 11 आवेदन आए; 8 मामलों का ऑन-स्पॉट निस्तारण, उप सरपंच ललन कुंवर की दो टूक—"समस्या का समाधान नहीं होने पर करेंगे बड़ा संघर्ष"

भागलपुर/नवगछिया (विशेष संवाददाता): बिहार के बाढ़ और कटाव प्रभावित संवेदनशील नवगछिया अनुमंडल क्षेत्र में ग्रामीण विकास योजनाओं और जनता की शिकायतों के निस्तारण के लिए जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान की जमीनी हकीकत इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। इसी कड़ी में बुधवार को नवगछिया के ध्रुबगंज और राघोपुर पंचायत में विशेष जन-सहयोग शिविर (जनता दरबार) का आयोजन किया गया। हालांकि प्रशासन का दावा था कि इन शिविरों के माध्यम से आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाएगा, लेकिन धरातल पर जो तस्वीर उभरी वह बेहद चौंकाने वाली थी। दोनों पंचायतों को मिलाकर महज 11 आवेदन ही प्राप्त हुए, जिससे प्रशासनिक अभियानों के प्रति ग्रामीणों की घटती रुचि या सूचना के अभाव साफ तौर पर उजागर होता है। हालांकि, प्रशासनिक टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए इन 11 में से 8 मामलों का मौके पर ही त्वरित समाधान कर दिया, लेकिन शेष मामलों और व्यवस्था के रवैये को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी असंतोष देखा गया।

मात्र 11 आवेदन: क्या गांवों में सब कुछ ठीक है या जनता का भरोसा डिगा है?

ध्रुबगंज और राघोपुर जैसी घनी आबादी वाली पंचायतों में केवल 11 आवेदन आना प्रशासनिक गलियारों में गंभीर मंथन का विषय बन गया है:

प्रचार-प्रसार की कमी या उदासीनता: स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि इस तरह के शिविरों की पूर्व सूचना सही समय और व्यापक स्तर पर ग्रामीणों तक नहीं पहुंच पाती है, जिसके कारण जरूरतमंद लोग शिविर तक पहुंच ही नहीं पाते।

पूर्व के मामलों में टालमटोल से निराशा: ग्रामीणों का एक बड़ा वर्ग यह मान बैठा है कि कागजी आवेदनों से धरातल पर कोई खास बदलाव नहीं आता, क्योंकि कई बार पहले दिए गए प्रार्थना पत्र भी फाइलों में धूल फांकते नजर आए हैं। यही कारण है कि इस बार शिविर में लोगों की भारी भीड़ न जुटकर सन्नाटा सा पसरा रहा।

8 मामलों का ऑन-स्पॉट निस्तारण: प्रशासन की राहतभरी पहल

कम संख्या में ही सही, लेकिन जितने भी आवेदन प्राप्त हुए, उनमें प्रशासनिक अधिकारियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए फौरन कार्रवाई की:

किसे मिला लाभ: प्राप्त आवेदनों में मुख्य रूप से सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राशन कार्ड संशोधन, और नल-जल योजना की आंशिक गड़बड़ियों से जुड़े मामले शामिल थे।

तत्काल एक्शन: बीडीओ और पंचायत स्तरीय कर्मियों की टीम ने मौके पर ही कागजी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए 8 मामलों का निष्पादन कर दिया, जिससे राहत पाने वाले लाभुकों के चेहरे पर कुछ समय के लिए मुस्कान जरूर लौटी।

उप सरपंच ललन कुंवर की दो टूक: "समस्या का समाधान नहीं होने पर होगा कड़ा विरोध"

शिविर के दौरान स्थानीय ध्रुबगंज पंचायत के उप सरपंच ललन कुंवर ने प्रशासन के समक्ष जनता का पक्ष बेहद आक्रामक और बेबाक तरीके से रखा। उन्होंने शिविर की व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली पर तीखे सवाल उठाए:

अधिकारियों को दो टूक चेतावनी: उप सरपंच ललन कुंवर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी समस्याओं—जैसे कटाव निरोधक कार्य, शुद्ध पेयजल, आवास योजना में धांधली और पेंशन के नाम पर हो रही टालमटोल—का समयबद्ध और स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो जनता चुप नहीं बैठेगी।

संघर्ष की हुंकार: मीडिया से बात करते हुए उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "जनता की समस्याओं का केवल कागजी खानापूर्ति कर देना समाधान नहीं है। यदि शिविरों के माध्यम से भी आम गरीबों को उनका हक और न्याय नहीं मिला, तो जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मिलकर प्रशासन के खिलाफ बड़ा और कड़ा संघर्ष करने के लिए बाध्य होंगे।"

ध्रुबगंज और राघोपुर की अन्य सुलगती समस्याएं

ध्रुबगंज और राघोपुर पंचायतें भौगोलिक रूप से गंगा और कोसी के मुहाने पर बसी होने के कारण हमेशा समस्याओं के घेरे में रहती हैं:

कटाव और विस्थापन का संकट: यहाँ के लोगों की सबसे बड़ी विभीषिका नदी का कटाव है। हर साल सैकड़ों बीघा उपजाऊ जमीन और दर्जनों घर नदी में समा जाते हैं, लेकिन स्थायी समाधान के नाम पर केवल आश्वासन मिलते हैं।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव: शिविर में भले ही कुछ छोटे-मोटे मामले सुलझ गए हों, लेकिन क्षेत्र की मुख्य समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है।

नवगछिया के ध्रुबगंज और राघोपुर पंचायत में बुधवार को आयोजित सहयोग शिविर में मात्र 11 आवेदनों का आना और उसके बाद उप सरपंच ललन कुंवर द्वारा दी गई चेतावनी यह स्पष्ट करती है कि जनता और प्रशासन के बीच अभी भी संवाद और भरोसे की एक बड़ी खाई मौजूद है। 8 मामलों का ऑन-स्पॉट समाधान निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है, लेकिन जब तक जमीनी और बड़ी समस्याओं का स्थायी हल नहीं निकाला जाता, तब तक ऐसे शिविरों की सार्थकता पर सवाल उठते रहेंगे। प्रशासन को उप सरपंच की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए धरातल पर ठोस कार्य करने की सख्त जरूरत है।