टीएमबीयू के पेंशनरों का फूटा गुस्सा फरवरी की पेंशन नहीं मिलने पर विश्वविद्यालय में किया हंगामा, कुलसचिव से वार्ता; वित्त पदाधिकारी के नहीं मिलने से बढ़ी नाराजगी

भागलपुर (विशेष संवाददाता): तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और कर्मचारियों-पेंशनरों की समस्याओं को लेकर सुर्खियों में आ गया है। विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी (पेंशनर) एक बार फिर आर्थिक संकट और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर आक्रोशित हो उठे हैं। मामला तब गंभीर हो गया जब समय पर फरवरी महीने की पेंशन खातों में नहीं पहुंचने से क्षुब्ध होकर बड़ी संख्या में पेंशनर सीधे विश्वविद्यालय मुख्यालय जा पहुंचे। प्रशासनिक भवन में जमकर नाराजगी जाहिर करते हुए पेंशनरों ने अधिकारियों के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान पेंशनरों ने कुलसचिव (Registrar) से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन वित्त पदाधिकारी (Finance Officer - FO) के अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं मिलने और मुलाकात से बचने के कारण पेंशनरों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

क्या है पूरा मामला? समय पर पेंशन नहीं मिलने से बढ़ा संकट

विश्वविद्यालय के पेंशनरों का आरोप है कि उन्हें हर महीने नियमित रूप से पेंशन मिलने में लगातार देरी का सामना करना पड़ रहा है:

फरवरी की पेंशन से वंचित पेंशनर: सेवानिवृत्त कर्मियों का कहना है कि महीने का लंबा समय बीत जाने के बावजूद उनके बैंक खातों में फरवरी माह की पेंशन की राशि क्रेडिट नहीं हुई है।

भुखमरी और आर्थिक तंगी की कगार: अधिकांश पेंशनरों की आजीविका पूरी तरह से इसी पेंशन पर निर्भर है। इस उम्र में दवाइयों का खर्च, घर का किराया और दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्हें समय पर पेंशन की सख्त जरूरत होती है, लेकिन टीएमबीयू प्रशासन की उदासीनता के कारण उन्हें हर महीने इस आर्थिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है।

पूर्व के आश्वासन भी साबित हुए खोखले: पेंशनरों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा हर बार केवल झूठे आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

विवि मुख्यालय में हंगामा और कुलसचिव से तीखी वार्ता

आक्रोशित पेंशनर जब टीएमबीयू प्रशासनिक भवन पहुंचे, तो वहां का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया:

कुलसचिव के समक्ष रखी अपनी पीड़ा: पेंशनरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कुलसचिव से मुलाकात कर उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही अब बर्दाश्त के बाहर हो चुकी है।

वित्त पदाधिकारी (FO) की गैर-मौजूदगी पर भड़के पेंशनर: जब पेंशनरों ने वित्तीय मामलों के सीधे प्रभारी यानी वित्त पदाधिकारी (Finance Officer) से मिलने का प्रयास किया, तो वे अपने कक्ष में उपस्थित नहीं मिले। पेंशनरों का आरोप है कि वे जानबूझकर अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए सामने आने से कतरा रहे हैं। एफओ के नहीं मिलने पर पेंशनरों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी भड़ास निकाली।

प्रशासनिक अधिकारियों की सफाई: कुलसचिव ने मौके पर मौजूद पेंशनरों को शांत कराने का प्रयास किया और आश्वासन दिया कि उनके बकाए और फरवरी माह की पेंशन के भुगतान के लिए बैंक और वित्त विभाग से समन्वय स्थापित किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द राशि उनके खातों में ट्रांसफर की जा सके।

पेंशनरों की चेतावनी: उग्र आंदोलन की दी चेतावनी

विश्वविद्यालय के बुजुर्ग पेंशनरों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान नहीं किया गया, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे:

आमरण अनशन की तैयारी: पेंशनर संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि एक-दो दिनों के भीतर फरवरी माह की पेंशन का भुगतान नहीं किया जाता है, तो वे विश्वविद्यालय गेट पर धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।

मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखने का आरोप: पेंशनरों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि अपनी पूरी जिंदगी विश्वविद्यालय को समर्पित करने के बाद आज बुढ़ापे में उन्हें अपने ही हक के पैसे के लिए इस तरह दर-दर भटकना पड़ रहा है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

टीएमबीयू के पेंशनरों को फरवरी माह की पेंशन नहीं मिलने के कारण उपजा यह विवाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। वित्त पदाधिकारी की अनुपस्थिति और प्रशासनिक टालमटोल के रवैये ने आग में घी का काम किया है। अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस गंभीर मामले में कितनी जल्दी संज्ञान लेता है और पेंशनरों के खातों में राशि भेजकर उनके गुस्से को शांत करता है।