30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक, हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा पूरा शहर

जयपुर : पवित्र सावन मास के दूसरे सोमवार के अवसर पर देवभूमि और गुलाबी शहर जयपुर के ऐतिहासिक व आस्था के प्रमुख केंद्र गोनूबाबा धाम मंदिर में शिव भक्तों का अद्भुत जनसैलाब उमड़ पड़ा। भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक और दर्शन के लिए अलसुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, सावन के इस पावन दूसरे सोमवार को गोनूबाबा धाम में 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने विधि-विधान के साथ बाबा का जलाभिषेक कर मन्नतें मांगीं। सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव', 'बम-बम भोले' और 'ओम नमः शिवाय' के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा, जिससे पूरा वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

अलसुबह 4 बजे से ही शुरू हो गया था पूजा-अर्चना का सिलसिला

सावन के दूसरे सोमवार की महत्ता को देखते हुए शिव भक्तों में गजब का उत्साह देखा गया:

भोर की बेला में खुले मंदिर के कपाट: भक्तों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन और पुजारियों द्वारा अलसुबह 4 बजे ही मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए थे।

पहला जलाभिषेक: कपाट खुलते ही सबसे पहले मंदिर के मुख्य पुजारियों ने विधि-विधान से गोनूबाबा का दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष श्रृंगार किया। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश शुरू कर दिया गया, जिसके बाद कतारों में खड़े भक्तों ने अनुशासनबद्ध तरीके से जलाभिषेक किया।

लंबी कतारों में घंटों खड़े रहे भक्त, अटूट था विश्वास

गोनूबाबा धाम मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं का उत्साह चिलचिलाती धूप या लंबी कतारों की परवाह किए बिना देखते ही बनता था:

विभिन्न आयु वर्ग के श्रद्धालुओं की भागीदारी: इस धार्मिक अनुष्ठान में केवल युवा या बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाएं, युवतियां और छोटे-छोटे बच्चे भी पारंपरिक परिधानों में हाथों में जल का लोटा, बेलपत्र, धतूरा, भांग और फूल-मालाएं लेकर पहुंचे थे।

भक्तों की आस्था की कहानी: कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वे सुबह 4 बजे से ही कतार में खड़े थे और अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे थे। भक्तों का मानना है कि सावन के सोमवार के दिन सच्चे मन से गोनूबाबा की आराधना करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

सुरक्षा और व्यवस्था के थे पुख्ता इंतजाम

30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के एक साथ जुटने के कारण मंदिर परिसर और आसपास के रास्तों पर भारी भीड़ की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा चाक-चौबंद व्यवस्था की गई थी:

पुलिस बल की तैनाती: कानून-व्यवस्था और सुचारू दर्शन सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन और महिला सुरक्षाकर्मियों की विशेष तैनाती की गई थी।

क्यू-मैनेजमेंट (कतार प्रबंधन): बैरिकेडिंग की पुख्ता व्यवस्था होने के कारण श्रद्धालुओं को धक्का-मुक्की या परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा और सभी ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बारी आने पर जल अर्पित किया।

स्वयंसेवकों की भूमिका: विभिन्न धार्मिक संगठनों और मंदिर कमेटियों के स्वयंसेवक पानी वितरण, वृद्धजनों और महिलाओं की सहायता के लिए मुस्तैद नजर आए।

विशेष श्रृंगार और महाआरती का आयोजन

सावन के दूसरे सोमवार के अवसर पर गोनूबाबा धाम को विशेष रूप से फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी (विद्युत सज्जा) से सजाया गया था:

संध्या कालीन महाआरती: दिनभर चले जलाभिषेक के बाद शाम को भव्य महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। आरती के दौरान गूंजते मंत्रोच्चार और शंखनाद से पूरा मंदिर परिसर आलौकिक ऊर्जा से भर गया।

प्रसाद वितरण: आरती के उपरांत उपस्थित सभी भक्तों के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।

जयपुर के गोनूबाबा धाम मंदिर में सावन के दूसरे सोमवार पर उमड़ी 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ और उनकी अटूट आस्था यह साबित करती है कि भारतीय संस्कृति में सनातन परंपराओं और भगवान शिव के प्रति लोगों का विश्वास कितना गहरा है। यह पावन पर्व न केवल आपसी भाईचारे और धार्मिक सौहार्द का संदेश देता है, बल्कि हर व्यक्ति के मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। गोनूबाबा धाम का यह दूसरा सोमवार जयपुर वासियों के लिए लंबे समय तक एक यादगार और पावन स्मृति बना रहेगा।