पेपर लीक के खिलाफ बिहार बंद के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई; पटना, छपरा और सीतामढ़ी समेत 5 जिलों से 350 से अधिक उपद्रवी गिरफ्तार, कईयों पर गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज

पटना, मुख्य संवाददाता: देश और सूबे की शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाले पेपर लीक मामलों के खिलाफ हाल ही में आहूत 'बिहार बंद' के दौरान सड़कों पर हुए उग्र प्रदर्शन, तोड़फोड़ और हिंसा को लेकर अब प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में बंद के नाम पर कानून को हाथ में लेने, सरकारी-गैरसरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने और पुलिस बल पर हमले करने वाले उपद्रवियों पर आखिरकार 'कानून का डंडा' चल गया है। बिहार पुलिस मुख्यालय से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, राजधानी पटना, सारण (छपरा), सीतामढ़ी समेत राज्य के 5 प्रमुख संवेदनशील जिलों से अब तक कुल 350 से अधिक उपद्रवियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके साथ ही दर्जनों अज्ञात और नामजद प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई तेजी से शुरू कर दी गई है।

क्या था पूरा मामला और कैसे भड़की थी बंद के दौरान हिंसा?

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों, धांधलियों और प्रशासनिक लापरवाहियों के खिलाफ छात्र संगठनों और विपक्षी दलों द्वारा बिहार बंद का आह्वान किया गया था। शुरुआत में यह आंदोलन शांतिपूर्ण नजर आ रहा था, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों का गुस्सा बेकाबू हो गया।

यातायात और जनजीवन पूरी तरह ठप: सुबह होते ही बंद समर्थकों ने कई जिलों में रेलवे ट्रैक, मुख्य सड़कों और नेशनल हाईवे को जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

तोड़फोड़ और उपद्रव: कुछ उग्र तत्वों ने शहर के प्रमुख मार्गों पर दौड़ रही गाड़ियों, बसों और दुकानों को निशाना बनाया। कई जगहों पर तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं, जिससे आम नागरिकों और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

पुलिस पर हमला: जब पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उग्र भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया, तो कुछ उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव कर दिया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

5 प्रमुख जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी, 350 गिरफ्तार

हिंसा और तोड़फोड़ की इन घटनाओं को बेहद गंभीरता से लेते हुए बिहार के पुलिस महकमे ने वीडियोग्राफी और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान करने का विशेष अभियान चलाया। राज्य के जिन 5 प्रमुख जिलों में सबसे अधिक उपद्रव देखा गया था, वहां पुलिस ने रातभर छापेमारी कर बड़ी गिरफ्तारियां की हैं।

राजधानी पटना में सबसे बड़ी कार्रवाई: पटना के डाकबंगला चौराहा, बोरिंग रोड और राजेंद्र नगर टर्मिनल के पास हुए हंगामे और तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने कई उपद्रवियों को दबोचा है। सीसीटीवी फुटेज और मीडिया फुटेज के जरिए उन चेहरों की पहचान की गई है जिन्होंने तोड़फोड़ में मुख्य भूमिका निभाई थी।

छपरा (सारण) और सीतामढ़ी में सख्ती: छपरा और सीतामढ़ी जिलों में भी बंद के दौरान सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने वाले असामाजिक तत्वों की धड़पकड़ के लिए विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया था, जिनके जरिए ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां की गई हैं।

अन्य जिले भी शामिल: इन जिलों के अलावा अन्य दो संवेदनशील इलाकों से भी कुल मिलाकर 350 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर थाने भेजा गया है, जहाँ उनसे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है।

गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज, वीडियो फुटेज से हो रही पहचान

पुलिस मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून को हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। गिरफ्तार किए गए लोगों के अलावा कई अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भी नामजद और सामूहिक FIR दर्ज की गई है।

कानून की सख्त धाराएं: इन सभी उपद्रवियों पर बलवा (Rioting), लोक संपत्ति को नुकसान निवारण अधिनियम (Prevention of Damage to Public Property Act), सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिस बल पर हमले जैसी गंभीर और गैर-जमानती धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल: पुलिस उपद्रवियों की पहचान के लिए ड्रोन कैमरे, स्थानीय सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की मदद ले रही है। अधिकारियों का कहना है कि जो लोग इस हिंसा के पीछे मास्टरमाइंड के रूप में शामिल थे, उन्हें भी बहुत जल्द कानून के शिकंजे में लाया जाएगा।

प्रशासन की दो टूक: "विरोध का अधिकार है, लेकिन हिंसा बर्दाश्त नहीं"

इस बड़ी कार्रवाई के बाद गृह विभाग और पुलिस प्रशासन की ओर से एक बार फिर स्पष्ट संदेश दिया गया है कि लोकतांत्रिक देश में प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने और विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति या संगठन आंदोलन की आड़ में हिंसा फैलाता है, तोड़फोड़ करता है या आम जनता की सुरक्षा को खतरे में डालता है, तो उसके खिलाफ प्रशासन अत्यंत कठोर और सख्त कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

पेपर लीक के खिलाफ हुए बिहार बंद के दौरान उपद्रव मचाने वालों पर पुलिस द्वारा की गई यह ताबड़तोड़ कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों की खैर नहीं है। 350 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी और मुकदमों का यह शिकंजा उन तमाम असामाजिक तत्वों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो विरोध के नाम पर अराजकता फैलाना चाहते हैं। फिलहाल, प्रशासन ने पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक चाक-चौबंद कर दी है ताकि किसी भी संभावित अप्रिय स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।