पूर्णिया: रूपौली प्रखंड मुख्यालय पर भाकपा माले और खेत ग्रामीण मजदूर सभा का जोरदार प्रदर्शन; 11 सूत्री मांगों को लेकर प्रशासन के खिलाफ हुंकार, आम जनता और किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरा

पूर्णिया (बिहार): बिहार के पूर्णिया जिले के रूपौली प्रखंड क्षेत्र से राजनीति, जनसमस्याओं और वामपंथी संगठनों के आंदोलनात्मक तेवर को दर्शाती एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भाकपा माले (CPI-ML) तथा अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (AIRLA) के संयुक्त बैनर तले गुरुवार को सैकड़ों कार्यकर्ताओं, किसानों और मजदूरों ने रूपौली प्रखंड मुख्यालय पर एक विशाल प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी 11 सूत्री मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ रोष प्रकट किया। गरीबों के लिए आवास, जमीन का पर्चा, मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी, बाढ़-कटाव पीड़ितों के लिए मुआवजा और भ्रष्टाचार पर रोक जैसी प्रमुख मांगों को लेकर आयोजित इस प्रदर्शन ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। प्रदर्शन के अंत में एक प्रतिनिधिमंडल ने अंचल अधिकारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी को राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें चेतावनी दी गई कि यदि समय रहते मांगों का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।

सीमांचल के ग्रामीण इलाकों में जन आंदोलनों की प्रासंगिकता, गरीबों और मजदूरों के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियां, 11 सूत्री मांगों का विस्तृत खाका और प्रशासनिक प्रतिक्रिया का एक विश्लेषणात्मक विवरण आइए समझते हैं।

आंदोलन की पृष्ठभूमि: रूपौली में क्यों सुलग रहा है असंतोष?

रूपौली और आसपास का सीमांचल क्षेत्र कृषि प्रधान होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं, भूमि सुधार और मजदूरों के अधिकारों के मामले में लंबे समय से संघर्षरत रहा है।

जमीन और पर्चा का पुराना सवाल: आज भी हजारों भूमिहीन परिवार ऐसे हैं जिनके पास सिर छिपाने के लिए अपनी जमीन नहीं है। सरकार द्वारा बांटी जाने वाली वासगीत पर्चा (Vasgeet Parcha) योजना कागजों तक सिमट कर रह गई है, जिससे गरीबों में आक्रोश है।

मजदूरी और महंगाई की मार: ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है, जबकि बढ़ती महंगाई ने गरीब परिवारों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है।

भ्रष्टाचार और दलालों का बोलबाला: प्रखंड से लेकर अंचल कार्यालय तक व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण आम गरीबों को अपने छोटे-छोटे कामों (जैसे राशन कार्ड, वृद्धा पेंशन, आवास योजना की किस्त) के लिए दलालों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

 11 सूत्री मांगें: जनसभा और प्रदर्शन के मुख्य बिंदु

प्रखंड मुख्यालय पर आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान भाकपा माले और खेत मजदूर सभा के नेताओं ने अपनी जिन 11 प्रमुख मांगों को प्रमुखता से उठाया, उनका विस्तृत विवरण इस प्रकार है:

भूमिहीनों को वासगीत पर्चा: सभी गरीबों और भूमिहीन परिवारों को तत्काल पांच-पांच डिसमिल जमीन का पर्चा और पक्का मकान बनाने के लिए इंदिरा आवास/प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया जाए।

 न्यूनतम मजदूरी की गारंटी: मनरेगा और कृषि कार्यों में लगे मजदूरों के लिए प्रतिदिन कम से कम 600 रुपये मजदूरी सुनिश्चित की जाए और साल में 200 दिन काम की गारंटी दी जाए।

 वृद्धा और विकलांग पेंशन में वृद्धि: वृद्धावस्था, विधवा और विकलांग पेंशन की राशि को बढ़ाकर कम से कम 3000 रुपये प्रति माह किया जाए और लंबित पेंशन का त्वरित भुगतान हो।

 भ्रष्टाचार पर लगाम: प्रखंड और अंचल कार्यालयों में व्याप्त बिचौलिया राज और रिश्वतखोरी पर पूरी तरह रोक लगाई जाए, तथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

 बाढ़ और सुखाड़ राहत: रूपौली क्षेत्र में हर साल आने वाली बाढ़ और सूखाग्रस्त स्थितियों से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा और फसल क्षति बीमा का लाभ मिले।

स्वास्थ्य सेवाओं का सुधार: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रूपौली में डॉक्टरों और चिकित्सीय उपकरणों की समुचित व्यवस्था हो ताकि गरीबों को महंगे निजी अस्पतालों के चक्कर न काटने पड़ें।

 शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना: सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर किया जाए और गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण मुफ्त शिक्षा सुनिश्चित हो।

 सिंचाई और बिजली व्यवस्था: किसानों को खेती के लिए मुफ्त या रियायती दरों पर बिजली और सिंचाई के लिए डीजल अनुदान समय पर उपलब्ध कराया जाए।

 राशन कार्ड में सुधार: गरीब परिवारों के कटे हुए राशन कार्ड पुनः जोड़े जाएं और जन वितरण प्रणाली (PDS) में पारदर्शिता लाई जाए।

 कानून व्यवस्था और सुरक्षा: बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाई जाए और दलित-शोषित वर्ग पर होने वाले हमलों के खिलाफ सख्त पुलिसिया कार्रवाई हो।

विस्थापितों का पुनर्वास: नदी कटाव से बेघर हुए परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसाया जाए और उन्हें तत्काल सहायता पहुंचाई जाए।

नेताओं के तीखे तेवर और प्रशासन को चेतावनी

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए भाकपा माले और खेत मजदूर सभा के दिग्गज नेताओं ने सरकार और स्थानीय प्रशासन पर जमकर निशाना साधा।

गरीबों की उपेक्षा का आरोप: नेताओं ने कहा कि मौजूदा सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन धरातल पर गरीब, किसान और मजदूर बदहाल जिंदगी जीने को मजबूर हैं। अफसरशाही इस कदर हावी है कि जनता की सुनने वाला कोई नहीं है।

आर-पार की लड़ाई का ऐलान: नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि जिला प्रशासन ने 11 सूत्री मांगों पर गंभीरता दिखाते हुए एक महीने के भीतर ठोस पहल नहीं की, तो रूपौली प्रखंड से लेकर जिला मुख्यालय तक अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम किया जाएगा।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया और ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया

प्रदर्शन के उग्र रूप को देखते हुए प्रखंड प्रशासन और स्थानीय पुलिस पहले से ही सतर्क नजर आई।

शांतिपूर्ण समापन: हालांकि प्रदर्शन काफी बड़ा था, लेकिन पुलिस बल की मौजूदगी में यह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। जुलूस के रूप में प्रखंड मुख्यालय पहुंचे लोगों ने सभा को संबोधित किया।

ज्ञापन प्राप्ति: अंचल अधिकारी और बीडीओ ने संयुक्त रूप से प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल से मिलकर उनका 11 सूत्री मांग पत्र स्वीकार किया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि मांगों के बिंदुओं की जांच कर नियमानुसार उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी और स्थानीय स्तर पर निस्तारण योग्य समस्याओं का समाधान जल्द किया जाएगा।

रूपौली प्रखंड मुख्यालय पर भाकपा माले और खेत ग्रामीण मजदूर सभा के बैनर तले हुआ यह 11 सूत्री प्रदर्शन इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सीमांचल के ग्रामीण इलाकों में आम जनता अपने अधिकारों के प्रति अब मुखर हो रही है। भूमिहीनों के हक, मजदूरों की मजदूरी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी यह आवाजें सत्ता के गलियारों तक गूंज रही हैं। यदि समय रहते इन बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह जनाक्रोश एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकता है, जिससे प्रशासन के लिए निपटना और अधिक कठिन हो जाएगा।