पूर्णिया विश्वविद्यालय: पीजी सत्र 2026-28 में नामांकन को लेकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह को सौंपा ज्ञापन, छात्रों के भविष्य को लेकर की गई विशेष मांग

 पूर्णिया विश्वविद्यालय (Purnia University) क्षेत्र में उच्च शिक्षा और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए लगातार सक्रिय रहने वाले संगठन 'स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया' (Students Association of India) का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को विश्वविद्यालय मुख्यालय पहुँचा। संगठन के सदस्यों ने पूर्णिया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह से मुलाकात कर उन्हें एक मांग पत्र सौंपा। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य आगामी स्नातकोत्तर (PG) सत्र 2026-28 में नामांकन प्रक्रिया को समय पर शुरू करने, सीटों की संख्या में बढ़ोतरी करने और प्रवेश परीक्षा से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सकारात्मक चर्चा करना था। छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर कुलपति ने संगठन के प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रहित में हरसंभव उचित कदम उठाएगा। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट के माध्यम से जानते हैं इस पूरी मुलाकात, छात्रों की प्रमुख मांगों और विश्वविद्यालय के रुख के बारे में।

स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का शिष्टमंडल कुलपति से मिला

पूर्णिया विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं की समस्याओं को लेकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का प्रतिनिधिमंडल पूरी तैयारी के साथ कुलपति कार्यालय पहुंचा था।

कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह से मुलाकात: शिष्टमंडल ने कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह का स्वागत करते हुए उन्हें स्नातकोत्तर (PG) सत्र 2026-28 के नामांकन से जुड़ी विभिन्न व्यावहारिक कठिनाइयों से अवगत कराया।

छात्रों की बढ़ती संख्या का हवाला: प्रतिनिधियों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में स्नातक (UG) उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। ऐसे में पीजी में नामांकन के लिए मारामारी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिससे कई मेधावी छात्र उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।

प्रमुख मांगें: समय पर सत्र और सीटों में बढ़ोतरी

ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखीं, जिन पर तुरंत विचार करने का आग्रह किया गया:

समय पर नामांकन प्रक्रिया शुरू हो: संगठन ने मांग की कि पीजी सत्र 2026-28 के लिए आवेदन प्रक्रिया और प्रवेश परीक्षा का शेड्यूल जल्द से जल्द जारी किया जाए, ताकि सत्र विलंब न हो और छात्रों का बहुमूल्य समय बर्बाद न हो।

विभिन्न विषयों में सीटों का विस्तार: विश्वविद्यालय और अंगीभूत कालेजों (Constituent Colleges) में पीजी की सीमित सीटों के कारण कटऑफ बहुत हाई चला जाता है। इसलिए लोकप्रिय विषयों (जैसे इतिहास, राजनीति विज्ञान, हिंदी, भूगोल, और विज्ञान संकाय के विषयों) में सीटों की संख्या बढ़ाई जाए।

पारदर्शी और सुगम प्रवेश प्रक्रिया: नामांकन के दौरान छात्रों को किसी प्रकार की तकनीकी या कागजी परेशानियों का सामना न करना पड़े, इसके लिए पोर्टल को पूरी तरह दुरुस्त और यूजर-फ्रेंडली रखने की मांग की गई।

कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह का सकारात्मक आश्वासन

छात्र नेताओं द्वारा रखी गई तमाम बातों को कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने बेहद गंभीरता और धैर्य के साथ सुना।

छात्रहित को सर्वोपरि रखना: कुलपति ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि पूर्णिया विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है। सत्र को नियमित रखना और सभी योग्य छात्रों को उच्च शिक्षा का अवसर देना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

समीक्षा कर उचित निर्णय का निर्देश: कुलपति ने मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों और परीक्षा विभाग के कर्मचारियों को निर्देश दिया कि पीजी सत्र 2026-28 के नामांकन और सीटों की उपलब्धता से जुड़ी समीक्षा जल्द पूरी की जाए, ताकि नियत समय पर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

छात्र संगठनों और विद्यार्थियों में उम्मीद की किरण

स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा उठाए गए इस कदम से पूर्णिया विश्वविद्यालय क्षेत्र के हजारों स्नातक उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं में एक नई उम्मीद जगी है।

नियमित सत्र की आस: पिछले कुछ समय से सत्र विलंब होने की वजह से छात्रों में जो चिंता का माहौल था, इस पहल से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद बंधेगी।

संगठन की चेतावनी: हालांकि, छात्र नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने तय समय पर नामांकन प्रक्रिया शुरू नहीं की और सीटों में वृद्धि नहीं की, तो संगठन व्यापक स्तर पर छात्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

पूर्णिया विश्वविद्यालय के पीजी सत्र 2026-28 में नामांकन को लेकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया और कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह के बीच हुई यह उच्च-स्तरीय वार्ता छात्रों के भविष्य के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई है। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन को धरातल पर उतारा जाता है, तो पूर्णिया विश्वविद्यालय के हजारों छात्र-छात्राओं का शैक्षणिक सफर बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से आगे बढ़ सकेगा।