एसडीएम कृष्ण चंद्र गुप्ता ने किया औचक निरीक्षण; दाखिल-खारिज और परिमार्जन के लंबित मामलों पर जताई नाराजगी, त्वरित निष्पादन के दिए कड़े निर्देश
भागलपुर/पीरपैंती (विशेष संवाददाता): बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती अंचल कार्यालय में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया जब अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) कृष्ण चंद्र गुप्ता ने अचानक पहुंचकर कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। एसडीएम के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य अंचल कार्यालय में आम नागरिकों से जुड़े कार्यों, विशेषकर भूमि संबंधी दस्तावेजों के निष्पादन की स्थिति की समीक्षा करना था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने दाखिल-खारिज (Mutation), परिमार्जन (Parimarjan), एलपीसी (LPC) और भू-स्वामी प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण मामलों की गहन पड़ताल की। इस दौरान सात ऐसे मामले सामने आए जो 75 दिनों से अधिक समय से लंबित थे, जिस पर एसडीएम ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और संबंधित अधिकारियों को कार्यों में और अधिक तेजी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए।
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य: जनता की सुविधा और जवाबदेही
प्रशासनिक सुधारों की कड़ी में पीरपैंती एसडीएम का यह औचक निरीक्षण काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है:
कार्यशैली पर नजर: एसडीएम का उद्देश्य यह परखना था कि अंचल कार्यालय में आने वाले फरियादियों की शिकायतों का निपटारा तय समय-सीमा के भीतर हो रहा है या नहीं।
डिजिटल और भौतिक दस्तावेजों का मिलान: निरीक्षण के दौरान उन्होंने अंचल के विभिन्न रजिस्टरों और ऑनलाइन पोर्टल (पोर्टल पर दर्ज आवेदनों) का बारीकी से मिलान किया ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
लंबित मामलों का खुलासा: '75 दिन' की देरी पर उठा सवाल
एसडीएम की समीक्षा में अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली के कई पहलू सामने आए:
75 दिनों से अधिक पुराने लंबित मामले: समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि सात ऐसे महत्वपूर्ण मामले थे, जो पिछले 75 दिनों से कार्यालय में धूल फांक रहे थे। इन मामलों के लंबित रहने से आवेदकों को बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे थे।
सुनवाई पूरी होने के बावजूद देरी: सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इन मामलों में सुनवाई की प्रक्रिया तो पूरी कर ली गई थी, लेकिन बावजूद इसके अंतिम निष्पादन (Final Disposal) में देरी हो रही थी। एसडीएम ने इस लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि जब सुनवाई पूरी हो गई थी, तो आदेश पारित करने में देरी क्यों की गई?
किन प्रमुख बिंदुओं पर हुई समीक्षा?
एसडीएम ने पीरपैंती अंचल कार्यालय की कार्यक्षमता को जांचने के लिए कई विभागों की समीक्षा की:
दाखिल-खारिज (Mutation): जमीन की खरीद-बिक्री के बाद नाम चढ़ाने की प्रक्रिया में हो रही देरी पर विशेष जोर दिया गया।
परिमार्जन (Parimarjan): रसीद और खतियान में सुधार के आवेदनों की स्थिति को देखा गया।
एलपीसी (Land Possession Certificate): लोन और अन्य कार्यों के लिए जरूरी एलपीसी जारी करने की गति की जांच हुई।
भू-स्वामी प्रमाणपत्र: किसानों और जमीन मालिकों को मिलने वाले भू-स्वामी प्रमाणपत्रों के वितरण की प्रक्रिया की समीक्षा की गई।
अधिकारियों को कड़े निर्देश: 'शून्य लंबितता' का लक्ष्य
निरीक्षण के बाद एसडीएम कृष्ण चंद्र गुप्ता ने अंचल कर्मियों और राजस्व अधिकारियों को साफ लहजे में चेतावनी दी:
त्वरित निष्पादन सुनिश्चित करें: उन्होंने कहा कि सरकारी नियमों के अनुसार, जनता से जुड़े कार्यों का निपटारा एक निश्चित समय-सीमा के भीतर होना चाहिए। यदि इसमें देरी होती है, तो यह सीधा जन-अधिकार का उल्लंघन है।
सप्ताहवार समीक्षा का आदेश: एसडीएम ने अंचल अधिकारी (CO) को निर्देश दिया कि वे अब से हर सप्ताह लंबित मामलों की समीक्षा खुद करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि पीरपैंती अंचल में 'शून्य लंबितता' (Zero Pendency) का लक्ष्य हासिल करना है।
प्रशासनिक सुधार और जनता का भरोसा
एसडीएम के इस दौरे से पीरपैंती के स्थानीय निवासियों में उम्मीद की किरण जगी है:
पारदर्शिता की उम्मीद: आम लोगों का कहना है कि यदि प्रशासनिक अधिकारी इसी तरह नियमित अंतराल पर निरीक्षण करते रहें, तो दलाली और भ्रष्टाचार पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी।
कार्यकुशलता में सुधार की अपेक्षा: पीरपैंती अंचल कार्यालय का यह निरीक्षण इस बात का प्रतीक है कि प्रशासन अब 'जनता के प्रति जवाबदेही' को प्राथमिकता दे रहा है।
एसडीएम कृष्ण चंद्र गुप्ता द्वारा पीरपैंती अंचल कार्यालय का निरीक्षण केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक सख्त प्रशासनिक संदेश है। दाखिल-खारिज और परिमार्जन जैसे मामलों में 75 दिनों की देरी पर जताई गई नाराजगी यह स्पष्ट करती है कि अब लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि इन निर्देशों का पालन पूरी ईमानदारी से किया गया, तो पीरपैंती अंचल में जमीन संबंधी कार्यों के लिए भटकने वाले आम नागरिकों को निश्चित रूप से बड़ी राहत मिलेगी। यह निरीक्षण सरकारी मशीनरी को सक्रिय और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक प्रभावी कदम है।