'साइबर स्मार्ट ट्यूजडे' के तहत स्कूलों में चलाया गया विशेष जागरूकता अभियान; छात्रों को डिजिटल अरेस्ट, फर्जी लिंक और ऑनलाइन ठगी से बचने के दिए गए गुर

भागलपुर : डिजिटल युग में जहां इंटरनेट ने हमारी जिंदगी को आसान बनाया है, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराधियों (Cyber Criminals) का जाल भी तेजी से फैलता जा रहा है। इसी-बढ़ते खतरे और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के उद्देश्य से भागलपुर पुलिस द्वारा मंगलवार को एक व्यापक और विशेष अभियान की शुरुआत की गई। पुलिस मुख्यालय के साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई के निर्देश के आलोक में जिलेभर में 'साइबर स्मार्ट ट्यूजडे' (Cyber Smart Tuesday) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अभियान के तहत भागलपुर के वरीय पुलिस अधिकारियों और साइबर एक्सपर्ट्स की टीम ने विभिन्न स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में पहुंचकर छात्र-छात्राओं को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। मुख्य कार्यक्रम शहर के ऐतिहासिक जिला स्कूल में आयोजित किया गया, जहां अधिकारियों ने बच्चों को आधुनिक साइबर ठगी के तौर-तरीकों से आगाह किया।

जिला स्कूल में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में उमड़ी भीड़

मंगलवार को आयोजित इस विशेष जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य केंद्र भागलपुर का जिला स्कूल रहा, जहां भारी संख्या में छात्र-छात्राएं और शिक्षक उपस्थित रहे:

शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी: कार्यक्रम में भागलपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमोद कुमार यादव, सिटी एसपी अतुलेश झा, अपर समाहर्ता (ADM) और साइबर डीएसपी सह साइबर थानेदार विनय रंजन विशेष रूप से मौजूद रहे।

छात्रों के साथ सीधा संवाद: अधिकारियों ने विद्यार्थियों से सीधा संवाद स्थापित किया और उन्हें समझाया कि आज के समय में तकनीक का इस्तेमाल जितना जरूरी है, उसके प्रति उतनी ही सावधानी बरतना भी अनिवार्य है। पुलिस अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं को बताया कि वे देश का भविष्य हैं और यदि वे जागरूक रहेंगे, तो अपने परिवार और समाज को भी साइबर ठगों के चंगुल से बचा सकते हैं।

साइबर अपराधियों के नए और खतरनाक हथकंडे

कार्यक्रम के दौरान साइबर डीएसपी विनय रंजन और अन्य एक्सपर्ट्स ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन और सरल भाषा में छात्रों को उन तमाम तरीकों से अवगत कराया जिसके जरिए आज ठगी को अंजाम दिया जा रहा है:

डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest): आजकल ठग खुद को सीबीआई, ईडी या कस्टम अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर लोगों को डराते हैं और उन्हें घर के एक कमरे में बंद रहने को मजबूर कर लाखों रुपये ऐंठ लेते हैं। छात्रों को चेताया गया कि पुलिस या जांच एजेंसियां कभी भी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती हैं।

फर्जी लिंक और फिशिंग (Phishing Links): बिजली बिल जमा करने, बैंक खाता अपडेट करने या केवाईसी (KYC) कराने के नाम पर भेजे जाने वाले अनजान लिंक्स पर क्लिक करने से किस तरह बैंक खाता खाली हो जाता है, इसकी विस्तार से जानकारी दी गई।

क्यूआर कोड और स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स: पार्ट-टाइम जॉब, ऑनलाइन निवेश (Investment) में भारी मुनाफे का लालच देकर या किसी सामान की खरीद-फविक्र के दौरान क्यूआर कोड स्कैन कराने और AnyDesk या TeamViewer जैसे स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स डाउनलोड कराकर ठगी करने के मामलों से सावधान रहने को कहा गया।

फर्जी कस्टमर केयर नंबर: गूगल पर सर्च कर फर्जी कस्टमर केयर नंबरों पर संपर्क करने पर होने वाली वित्तीय धोखाधड़ी के प्रति भी बच्चों को सतर्क किया गया।

बचाव के लिए पुलिस अधिकारियों द्वारा दिए गए 'सफलता के मूलमंत्र'

कार्यक्रम के दौरान छात्रों और शिक्षकों को कुछ बेहद जरूरी सुरक्षा टिप्स दिए गए, जिन्हें अपनाकर साइबर फ्रॉड से सुरक्षित रहा जा सकता है:

गोपनीयता बनाए रखें: अपने एटीएम कार्ड के डिटेल्स, सीवीवी (CVV), ओटीपी (OTP), यूपीआई पिन (UPI Pin) या बैंक खाते से जुड़ी कोई भी जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ भूलकर भी साझा न करें।

मजबूत पासवर्ड का प्रयोग करें: अपने सोशल मीडिया और बैंकिंग पासवर्ड को मजबूत और जटिल रखें तथा समय-समय पर उसे बदलते रहें। इसके साथ ही टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (Two-Factor Authentication) का उपयोग करें।

सीमित व्यक्तिगत जानकारी: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी (जैसे फोन नंबर, घर का पता, दैनिक गतिविधियां) सार्वजनिक करने से बचें।

ठगी होने पर तुरंत अपनाएं यह कदम: '1930' हेल्पलाइन

पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को जोर देकर बताया कि यदि कोई व्यक्ति अनजाने में साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे घबराने के बजाय तुरंत एक्शन लेना चाहिए:

तुरंत करें कॉल: घटना की जानकारी मिलते ही तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर '1930' पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

गोल्डन ऑवर का महत्व: साइबर अपराध के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे (Golden Hours) बेहद अहम होते हैं। यदि समय रहते शिकायत दर्ज करा दी जाती है, तो ट्रांजैक्शन को होल्ड कराकर ठगी गई राशि को वापस पाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

जिलेभर के अन्य शिक्षण संस्थानों में भी चला अभियान

केवल जिला स्कूल ही नहीं, बल्कि 'साइबर स्मार्ट ट्यूजडे' के तहत भागलपुर जिले के सभी अनुमंडलों, थानों और ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में भी पुलिस टीमों द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। राम रतन शाही हाई स्कूल सहित कई अन्य स्कूलों में भी पुलिस अधिकारियों ने छात्राओं और छात्रों को साइबर सुरक्षा की बारीकियां सिखाईं। शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने पुलिस के इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की और संकल्प लिया कि वे इस संदेश को अपने घर-परिवार और आस-पड़ोस के लोगों तक पहुंचाएंगे।

भागलपुर पुलिस द्वारा 'साइबर स्मार्ट ट्यूजडे' के तहत चलाया गया यह जागरूकता अभियान एक बेहद सराहनीय कदम है। आज के समय में जब बच्चे और युवा सबसे ज्यादा डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं, उन्हें साइबर अपराध के खतरों से अवगत कराना समय की सबसे बड़ी मांग है। पुलिस के इस प्रयास से न केवल नई पीढ़ी डिजिटल रूप से अधिक सुरक्षित और सतर्क बनेगी, बल्कि समाज में साइबर साक्षरता का दायरा भी व्यापक होगा। भागलपुर पुलिस ने संकेत दिए हैं कि आने वाले हफ्तों में भी यह अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि तकनीक के इस दौर में हर नागरिक सुरक्षित रह सके