सिल्क सिटी में सफाई व्यवस्था की पोल खोलती बदहाली; मुख्य सड़कों से लेकर अंदरूनी मोहल्लों तक देर शाम तक बिखरा रहता है कचरा, डंपिंग यार्ड की कमी और लचर प्रबंधन से शहरवासी परेशान

भागलपुर, विशेष संवाददाता: स्मार्ट सिटी के दर्जे की दौड़ में शामिल ऐतिहासिक और पौराणिक नगरी भागलपुर की वास्तविक जमीनी हकीकत इन दिनों स्वच्छता के दावों पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रही है। शहर के पॉश इलाकों से लेकर तंग और घनी आबादी वाले अंदरूनी मोहल्लों तक, स्थिति यह है कि सुबह उठने वाले कचरे का उठाव होने के बाद भी दिनभर और देर शाम तक सड़कों के किनारे, चौराहों और खुले प्लॉटों पर कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। नियमित मॉनिटरिंग के अभाव, पर्याप्त डंपिंग यार्ड (Dumping Yards) की भारी कमी और नगर निगम की लचर कार्यशैली के कारण शहर की स्वच्छता व्यवस्था चरमरा गई है, जिससे आम नागरिकों का जीना मुहाल हो गया है।

प्रमुख सड़कों और चौराहों का हाल: दिन ढलने के बाद भी नहीं उठता कचरा

भागलपुर के मुख्य मार्ग हों या बाजार के व्यस्त इलाके, हर तरफ कचरे के खुले ढेर इस बात की गवाही दे रहे हैं कि नगर निगम के सफाई अभियान केवल कागजों तक ही सीमित हैं:

खुलते कचरे के ढेर: नियम के अनुसार, सुबह के वक्त निगम के सफाई कर्मियों द्वारा घरों और दुकानों से कचरा उठा लिया जाता है, लेकिन शाम होते-होते स्थानीय दुकानदारों, फेरीवालों और राहगीरों द्वारा फेंका गया कचरा सड़कों के किनारे फिर से ढेर का रूप ले लेता है।

दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप: देर शाम तक कचरा फैले रहने के कारण उससे उठने वाली सड़न और दुर्गंध से आसपास के दुकानदारों और राहगीरों का सांस लेना दूभर हो गया है। सड़े हुए कचरे पर भिनभिनाती मक्खियां और मंडराते मच्छर डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी खतरनाक संक्रामक बीमारियों को खुला निमंत्रण दे रहे हैं।

अंदरूनी इलाकों की स्थिति और भी बदतर

मुख्य सड़कों पर तो किसी तरह सफाई वाहन कभी-कभार नजर भी आ जाते हैं, लेकिन अंदरूनी मोहल्लों (जैसे लहेरी टोला, सूजागंज, खंजरपुर, मशाकचक, मुंदीचक आदि) की गलियों का हाल भगवान भरोसे है:

गलियों में बिखरा कूड़ा: इन तंग इलाकों में नियमित रूप से झाड़ू लगाने और कचरा उठाने वाली गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच पाती हैं। नतीजतन, लोग मजबूरन अपने घरों का कचरा खाली प्लॉटों, नालियों या सड़क के मोर्चों पर फेंकने को विवश हैं।

अवरुद्ध नालियां: गलियों में फैले कचरे का एक बड़ा हिस्सा बारिश के पानी के साथ बहकर नालियों में चला जाता है, जिससे नालियां पूरी तरह चोक हो जाती हैं। थोड़ी सी बारिश होते ही गंदा पानी सड़कों पर बहने लगता है, जिससे पैदल चलना तक असंभव हो जाता है।

डंपिंग यार्ड की कमी: शहर के भीतर अनियोजित कूड़ा संग्रहण

भागलपुर में कचरा प्रबंधन (Waste Management) के मोर्चे पर सबसे बड़ी समस्या एक सुव्यवस्थित और वैज्ञानिक डंपिंग यार्ड का अभाव है:

शहर के बीचों-बीच कचरे का अंबार: शहर के बाहर स्थायी डंपिंग जोन या सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट (Solid Waste Management Plant) की मुकम्मल व्यवस्था न होने के कारण नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न हिस्सों में ही अस्थायी रूप से कचरा डंप किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आक्रोश: जिन इलाकों के पास ये अस्थायी डंपिंग पॉइंट बनाए गए हैं, वहां के स्थानीय निवासी नरकीय जीवन जीने को विवश हैं। बच्चों और बुजुर्गों का स्वास्थ्य दिन-प्रतिदिन गिर रहा है। कई बार स्थानीय लोगों ने इसके खिलाफ प्रदर्शन भी किया है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर केवल आश्वासन के अलावा ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।

संबंधित विभागों और अधिकारियों की उदासीनता

नगर निगम के अधिकारियों और वार्ड पार्षदों की उदासीनता इस समस्या को और अधिक विकट बना रही है:

सुपरविजन का अभाव: सफाई एजेंसियों और कर्मियों पर प्रशासनिक नियंत्रण कमजोर होने के कारण वे अपनी मनमानी करते हैं। कागजों पर शत-प्रतिशत सफाई और फॉगिंग के दावे किए जाते हैं, जबकि धरातल पर सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है।

जनता की नाराजगी: शहरवासियों का कहना है कि वे नियमित रूप से टैक्स और होल्डिंग चुका रहे हैं, इसके बदले में उन्हें स्वच्छ परिवेश मिलने के बजाय गंदगी, बीमारियां और प्रशासनिक लापरवाही मिल रही है।

भागलपुर की सड़कों और अंदरूनी इलाकों में देर शाम तक फैले कचरे की यह समस्या शहर की छवि पर एक बड़ा कलंक है। यदि जिला प्रशासन और नगर निगम प्रशासन ने जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो स्थिति और भी विस्फोटक हो सकती है। शहर को वास्तव में 'स्मार्ट' बनाने के लिए वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली (Solid Waste Management System), पर्याप्त डंपिंग यार्ड की स्थापना, नियमित रूप से डोर-टू-डोर कचरा उठाव और लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर सख्त जुर्माने की व्यवस्था करना अनिवार्य हो गया है।