परीक्षा में धांधली और प्रश्न पत्र लीक की आशंका परटीएमबीयू का कड़ा एक्शन; फिजिक्स और गणित विभाग के दोनों हेड से 48 घंटे में मांगा गया स्पष्टीकरण, मची खलबली

भागलपुर, विशेष संवाददाता: सिल्क सिटी के तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) परिसर में परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बड़ा बवंडर खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय के अंतर्गत आयोजित होने वाली परीक्षाओं में कथित रूप से प्रश्न पत्र लीक होने और उत्तर पुस्तिकाओं की अदला-बदली का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई की है और फिजिक्स (भौतिकी) तथा गणित (Mathematics) विभाग के दोनों विभागाध्यक्षों (Heads) से 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण (शोकॉज नोटिस) की मांग की है। इस घटना के बाद से पूरे शैक्षणिक जगत में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है।

कैसे उजागर हुआ पूरा मामला? परीक्षा केंद्र पर पकड़े गए थे छात्र

यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब हाल ही में आयोजित परीक्षाओं के दौरान कड़ाई और औचक निरीक्षण किया गया:

उत्तर पुस्तिका बदलने का खेल: प्राप्त विवरण के अनुसार, मारवाड़ी कॉलेज परीक्षा केंद्र पर परीक्षा के दौरान कुछ परीक्षार्थियों द्वारा सादी उत्तर पुस्तिका (Blank Answer Sheet) की जगह पहले से लिखकर लाई गई उत्तर पुस्तिका को जमा करने का प्रयास किया गया। वीक्षकों की सतर्कता के कारण यह बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ा गया।

गणित और फिजिक्स विषय की परीक्षा पर संदेह: पकड़े गए विद्यार्थियों से जब कड़ाई से पूछताछ की गई और केंद्र द्वारा पूरे मामले की समीक्षा की गई, तो यह प्रबल आशंका जताई गई कि केवल नकल का मामला नहीं है, बल्कि इसके तार सीधे तौर पर प्रश्न पत्र लीक (Question Paper Leak) होने से जुड़े हो सकते हैं। परीक्षा केंद्र ने इस संबंध में अपनी विस्तृत रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दी।

परीक्षा विभाग का कड़ा रुख: 48 घंटे में मांगा गया जवाब

मारवाड़ी कॉलेज केंद्र से रिपोर्ट मिलने के तुरंत बाद विश्वविद्यालय का परीक्षा विभाग हरकत में आया:

नोटिस जारी और जवाब तलब: मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा नियंत्रक ने विश्वविद्यालय के पीजी फिजिक्स और पीजी गणित विभाग के विभागाध्यक्षों को नोटिस जारी कर दिया है। प्रशासन ने दोनों विभागों के प्रमुखों से पूछा है कि आखिर परीक्षा शुरू होने से पहले या परीक्षा के दौरान इस तरह की आंतरिक सेंधमारी कैसे संभव हुई और इसके लिए उनकी क्या जवाबदेही है।

तय सीमा: विश्वविद्यालय द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक दोनों ही विभागों के प्रमुखों को 48 घंटे के भीतर अपना लिखित जवाब परीक्षा विभाग के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, ताकि आगे की विधिवत और कड़ी कार्रवाई की जा सके।

विभागाध्यक्षों का पक्ष और तकनीकी पेंच

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू यह भी सामने आया है कि प्रशासनिक स्तर पर नोटिस जारी होने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर विभागों का रुख अलग है:

नोटिस मिलने से इनकार: मीडिया और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दोनों विभागों के विभागाध्यक्षों का कहना है कि उन्हें इस तरह का कोई आधिकारिक शोकॉज नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है।

छुट्टी और प्रभार का मामला: पीजी फिजिक्स विभाग के हेड के अवकाश पर होने के कारण प्रभार संभाल रहे शिक्षकों का तर्क है कि आधिकारिक पत्राचार प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वे इस पर अपना आधिकारिक पक्ष रखेंगे। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं दिख रहा है।

विश्वविद्यालय की साख पर सवाल और आगे की कार्रवाई

इस सनसनीखेज मामले के सामने आने के बाद छात्र संगठनों और बुद्धिजीवियों में भारी रोष व्याप्त है:

छात्र भविष्य के साथ खिलवाड़: शैक्षणिक जानकारों का कहना है कि यदि विश्वविद्यालय स्तर पर इस प्रकार प्रश्न पत्रों की गोपनीयता भंग होती है, तो यह संपूर्ण शिक्षा प्रणाली के लिए एक बदनुमा दाग है। मेहनत करने वाले योग्य छात्र इससे हतोत्साहित होते हैं।

जांच कमेटी के गठन की तैयारी: परीक्षा विभाग के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि 48 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है या प्रथम दृष्टया संलिप्तता पाई जाती है, तो विश्वविद्यालय स्तर पर एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित की जाएगी। साथ ही, दोषियों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराते हुए कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।

भागलपुर विश्वविद्यालय में प्रश्न पत्र लीक होने की आशंका और परीक्षा विभाग द्वारा 48 घंटे के भीतर दोनों विभागों के प्रमुखों से स्पष्टीकरण मांगा जाना यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अब इस तरह की अनियमितताओं को लेकर गंभीर हो रहा है। आने वाले कुछ घंटे यह तय करेंगे कि इस मामले में किसकी गर्दन फंसती है और विश्वविद्यालय इस कलंक से उबरने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है। पूरी शैक्षणिक बिरादरी की निगाहें अब परीक्षा विभाग के अगले एक्शन पर टिकी हुई हैं।