बुधवार को आयोजित सहयोग शिविर में उमड़े ग्रामीण; कुल 25 आवेदन प्राप्त, मौके पर ही 7 का त्वरित निष्पादन, एसडीएम और डीएसपी की मौजूदगी से महकमे में सक्रियता

भागलपुर/सबौर (विशेष संवाददाता): ग्रामीण स्तर पर आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान और शासन की योजनाओं को सीधे धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। इसी क्रम में भागलपुर जिले के सबौर प्रखंड के अंतर्गत आने वाली संवेदनशील परघड़ी पंचायत में बुधवार को एक भव्य जन-सहयोग शिविर (जनता दरबार) का आयोजन किया गया। इस शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें भागलपुर के प्रशासनिक तंत्र के शीर्ष अधिकारी—एसडीएम, डीएसपी, बीडीओ (प्रखंड विकास पदाधिकारी) और अन्य प्रमुख विभागों के जिला व प्रखंड स्तर के पदाधिकारी—स्वयं मौके पर मौजूद रहे। अधिकारियों की इस उच्चस्तरीय उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि सरकार अब जनता की समस्याओं के प्रति कितनी संजीदा है। शिविर के दौरान विभिन्न जनसमस्याओं से जुड़े कुल 25 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से प्रशासनिक तत्परता दिखाते हुए मौके पर ही 7 मामलों का सफल निष्पादन (Disposal) कर दिया गया, जबकि शेष आवेदनों पर भी त्वरित कार्रवाई के सख्त निर्देश दिए गए।

क्यों आयोजित किया गया परघड़ी पंचायत में यह विशेष शिविर?

प्रशासनिक अमले के अचानक और इतने बड़े स्तर पर पंचायत स्तर पर पहुंचने के पीछे एक सुविचारित रणनीति थी:

शिकायतों के निस्तारण में तेजी लाना: ग्रामीण अक्सर अपनी छोटी-छोटी शिकायतों और प्रमाणपत्रों के लिए प्रखंड या अनुमंडल कार्यालयों के चक्कर काटते-काटते थक जाते हैं। इस व्यवस्था को बदलने के लिए ही 'सरकार आपके द्वार' की त पर सहयोग शिविरों की श्रृंखला चलाई जा रही है।

अधिकारियों और जनता के बीच की खाई पाटना: जब प्रशासनिक मुखिया (जैसे एसडीएम और डीएसपी खुद) किसी गांव या पंचायत में पहुंचकर सीधे आम आदमी की पीड़ा सुनते हैं, तो जनता का सिस्टम पर भरोसा और अधिक मजबूत होता है। परघड़ी पंचायत का यह शिविर इसी विश्वास को और प्रगाढ़ करने का एक सशक्त माध्यम बना।

एसडीएम और डीएसपी की मौजूदगी से बदला माहौल

बुधवार को जैसे ही परघड़ी पंचायत भवन या निर्धारित शिविर स्थल पर एसडीएम और डीएसपी का काफिला पहुंचा, ग्रामीणों में भारी उत्साह और उम्मीद की लहर दौड़ गई:

सीधा संवाद: अधिकारियों ने किसी औपचारिकता के बिना सीधे ग्रामीणों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं। वृद्धों, महिलाओं और युवाओं ने बेझिझक अपनी परेशानियां अधिकारियों के सामने रखीं।

अधिकारियों की दो-टूक: शिविर में मौजूद डीएसपी और एसडीएम ने स्पष्ट शब्दों में विभागीय कर्मियों को निर्देश दिया कि जनता की फाइलों को लटकाने की प्रवृत्ति को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जो समस्याएं मौके पर हल हो सकती हैं, उन्हें बिना एक पल गंवाए तुरंत निस्तारित किया जाए।

शिविर में आए प्रमुख आवेदन और मुद्दों की बानगी

परघड़ी पंचायत के इस सहयोग शिविर में ग्रामीणों द्वारा कुल 25 लिखित आवेदन सौंपे गए, जिनमें विभिन्न विभागों से जुड़ी समस्याएं शामिल थीं:

भूमि विवाद और पैमाइश के मामले: ग्रामीण क्षेत्रों की सबसे बड़ी समस्या जमीन और आपसी हिस्सेदारी से जुड़ी होती है। शिविर में भूमि विवाद, अवैध कब्जा और दाखिल-खारिज में अड़चन से जुड़े कई आवेदन आए, जिन्हें अंचल अधिकारियों को सौंपते हुए प्राथमिकता से जांच के निर्देश दिए गए।

सामाजिक सुरक्षा पेंशन और राशन कार्ड: बुजुर्गों ने वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिलने या समय पर राशि ट्रांसफर न होने की शिकायत की। इसके अलावा नए राशन कार्ड बनवाने और नाम जुड़वाने के लिए भी महिलाओं ने बढ़-चढ़कर आवेदन दिए।

नल-जल और नाली-गली की समस्याएं: स्थानीय विकास योजनाओं की पोल खोलते हुए ग्रामीणों ने बताया कि उनके वार्डों में नल-जल योजना के तहत पानी की आपूर्ति बाधित है और रास्तों पर जलजमाव की गंभीर समस्या बनी हुई है।

पुलिस और विधि-व्यवस्था से जुड़े परिवाद: डीएसपी के समक्ष कुछ ग्रामीणों ने स्थानीय स्तर पर सुरक्षा और शांति व्यवस्था से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई की मांग रखी, जिस पर पुलिस अधिकारियों ने तत्काल संज्ञान लिया।

25 में से 7 मामलों का ऑन-स्पॉट निष्पादन

इस शिविर का सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि प्रशासनिक टीम ने कागजी खानापूर्ति करने के बजाय वास्तविक समाधान पर जोर दिया:

त्वरित न्याय और राहत: प्राप्त कुल 25 आवेदनों में से 7 मामलों का मौके पर ही (On-the-spot) निष्पादन कर दिया गया। जिन मामलों में प्रमाण पत्र या छोटी-सी प्रशासनिक प्रक्रिया बाकी थी, उन्हें तुरंत पूरा कर लाभुकों को राहत दी गई।

शेष मामलों के लिए डेडलाइन: बाकी बचे 18 आवेदनों को संबंधित विभागों (जैसे राजस्व, अंचल, आपूर्ति और ग्रामीण विकास) को सौंप दिया गया है और अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि एक निश्चित समय-सीमा के भीतर इन सभी मामलों का निष्पादन कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

ग्रामीणों की प्रतिक्रिया: "पहली बार लगा कि सरकार हमारी सुन रही है"

परघड़ी पंचायत के स्थानीय निवासियों ने इस उच्चस्तरीय सहयोग शिविर की भूरी-भूरी प्रशंसा की:

राहत की सांस: शिविर में अपना आवेदन देकर संतुष्ट लौटे एक बुजुर्ग ग्रामीण ने कहा, "आज तक हम सिर्फ अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काटते थे, लेकिन आज एसडीएम साहब और डीएसपी साहब खुद हमारी चौखट पर आए और हमारी बात सुनी। यह हमारे लिए बहुत बड़ी बात है।"

पारदर्शिता की सराहना: ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि यदि प्रशासन इसी तरह हर पंचायत में शिविर लगाकर काम करे, तो भ्रष्टाचार और दलालों का वर्चस्व स्वतः समाप्त हो जाएगा।

सबौर प्रखंड की परघड़ी पंचायत में आयोजित यह सहयोग शिविर प्रशासनिक सक्रियता और जन-कल्याण का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है। एसडीएम, डीएसपी और बीडीओ जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि यदि प्रशासन इच्छाशक्ति दिखाए, तो आम आदमी की समस्याओं का समाधान उसकी चौखट पर ही संभव है। 25 में से 7 मामलों का तुरंत निष्पादन और बाकी मामलों पर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन इस बात का प्रतीक है कि परघड़ी पंचायत के लोगों के लिए यह बुधवार सचमुच राहत और उम्मीद का दिन बनकर आया।