बेल्थू और मकंदपुर पंचायत में आयोजित मेगा सहयोग शिविर में उमड़े ग्रामीण, मिले कुल 22 आवेदन; 8 का मौके पर ही त्वरित निष्पादन, शेष प्रक्रियाधीन
भागलपुर/शाहकुंड (विशेष संवाददाता): ग्रामीण क्षेत्रों में जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान और शासन की कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन का विशेष अभियान जोर-शोर से जारी है। इसी कड़ी में भागलपुर जिले के शाहकुंड प्रखंड के अंतर्गत आने वाली बेल्थू और मकंदपुर पंचायत में बुधवार को भव्य जन-सहयोग शिविर (जनता दरबार) का आयोजन किया गया। इस शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) राजीव रंजन स्वयं प्रमुख रूप से मौजूद रहे, जिनकी मौजूदगी ने प्रशासनिक अमले को पूरी तरह सक्रिय रखा। शिविर के दौरान दोनों पंचायतों से विभिन्न जनसमस्याओं से जुड़े कुल 22 आवेदन प्राप्त हुए। प्रशासनिक तत्परता का परिचय देते हुए अधिकारियों ने इनमें से 8 मामलों का मौके पर ही (On-the-spot) सफल निष्पादन कर दिया, जबकि बाकी बचे 14 आवेदनों को संबंधित विभागों के सुपुर्द कर त्वरित प्रक्रियाधीन श्रेणी में रखा गया है।
क्यों आयोजित किए जा रहे हैं ऐसे पंचायत-स्तरीय शिविर?
बिहार सरकार और जिला प्रशासन के साझा दृष्टिकोण के तहत गांवों में ऐसे शिविर लगाने के पीछे एक स्पष्ट प्रशासनिक नीति है:
दफ्तरों के चक्कर से निजात: ग्रामीण अक्सर अपनी छोटी-छोटी शिकायतों—जैसे राशन कार्ड, पेंशन, दाखिल-खारिज या नाली-गली से जुड़ी समस्याओं—के लिए प्रखंड और अंचल कार्यालयों के चक्कर काटते-काटते परेशान हो जाते हैं। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य 'सरकार आपके द्वार' की तर्ज पर जनता को उनके ही क्षेत्र में राहत दिलाना है।
अधिकारियों की सीधी जवाबदेही: जब बीडीओ जैसे वरिष्ठ प्रखंड स्तरीय अधिकारी खुद पंचायत भवन या शिविर स्थल पर पहुंचकर फरियाद सुनते हैं, तो इससे न केवल मामलों के निष्पादन में तेजी आती है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता भी सुनिश्चित होती है।
बेल्थू और मकंदपुर पंचायत शिविर: क्या रहे प्रमुख मुद्दे?
बेल्थू और मकंदपुर पंचायतों में लगे इन शिविरों में सुबह से ही स्थानीय ग्रामीणों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। लोगों ने बढ़-चढ़कर अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं:
सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना: वृद्धों, विधवाओं और दिव्यांगजनों ने समय पर पेंशन न मिलने या बैंक खातों में राशि ट्रांसफर होने में आ रही अड़चनों को लेकर कई आवेदन दिए।
राद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण (राशन कार्ड): नए राशन कार्ड बनवाने और परिवार के छूटे हुए सदस्यों के नाम जुड़वाने के लिए महिलाओं ने बड़ी संख्या में आवेदन सौंपे।
नल-जल और ग्रामीण विकास: स्थानीय स्तर पर नल-जल योजना की विफलता, खराब पड़े चापाकल और रास्तों पर जलजमाव की समस्याओं को लेकर भी ग्रामीणों ने लिखित शिकायतें दर्ज कराईं।
भूमि और आवास योजना: प्रधानमंत्री आवास योजना की किस्तें रुकने और भूमि से जुड़े छोटे-मोटे विवादों को लेकर भी लोगों ने अपनी फरियाद रखी।
बीडीओ राजीव रंजन का बयान: "8 मामलों का ऑन-स्पॉट निष्पादन, 14 प्रक्रियाधीन"
शिविर की सफलता और प्राप्त आवेदनों के आंकड़ों की जानकारी देते हुए शाहकुंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) राजीव रंजन ने मीडिया को विस्तृत विवरण दिया:
"बेल्थू और मकंदपुर पंचायतों में आयोजित इस जन-सहयोग शिविर को लेकर ग्रामीणों में काफी उत्साह देखा गया। शिविर के दौरान कुल 22 आवेदन प्राप्त हुए। हमारी प्रशासनिक टीम ने तत्परता दिखाते हुए इनमें से 8 मामलों का मौके पर ही (On-the-spot) त्वरित निष्पादन कर दिया है। शेष बचे 14 मामलों को प्रक्रियाधीन (Under Process) रखा गया है, जिन्हें संबंधित विभागों के माध्यम से निर्धारित समय-सीमा के भीतर शत-प्रतिशत निष्पादित कर दिया जाएगा। सरकार की मंशा के अनुरूप हम हर जरूरतमंद तक राहत पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
प्रशासनिक मुस्तैदी और ऑन-स्पॉट समाधान
शिविर का सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि अधिकारियों ने कागजी खानापूर्ति करने के बजाय वास्तविक समाधान पर जोर दिया:
तत्काल राहत: जिन मामलों में छोटे-मोटे कागजात या सत्यापन की औपचारिकता बाकी थी, उन्हें वहीं पूरा कर लाभुकों को हाथों-हाथ समाधान दिया गया, जिससे 8 मामलों का तुरंत निपटारा संभव हो सका।
समय-सीमा के भीतर निस्तारण के निर्देश: बीडीओ राजीव रंजन ने शेष 14 प्रक्रियाधीन मामलों को लेकर सभी संबंधित पंचायत सचिवों, आवास सहायकों और राजस्व कर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे इन आवेदनों की जमीनी जांच कर जल्द से जल्द रिपोर्ट दें, ताकि जनता को बार-बार दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया और संतोष
शाहकुंड की इन दोनों पंचायतों में लगे शिविर से लौटे ग्रामीणों के चेहरों पर राहत का भाव साफ झलक रहा था:
अधिकारियों की पहुंच पर सराहना: स्थानीय निवासियों ने कहा कि अधिकारियों का खुद चलकर गांव तक आना और उनकी बात सुनना एक बहुत बड़ी राहत है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रक्रियाधीन 14 मामलों का भी जल्द ही सकारात्मक समाधान निकल आएगा।
नियमित शिविरों की मांग: जनता ने प्रशासन से आग्रह किया है कि इस तरह के जन-सहयोग शिविरों का आयोजन रोस्टर बनाकर हर महीने किया जाना चाहिए ताकि गांवों की छोटी-छोटी समस्याएं समय पर सुलझती रहें।
शाहकुंड प्रखंड की बेल्थू और मकंदपुर पंचायत में बीडीओ राजीव रंजन के नेतृत्व में आयोजित यह जन-सहयोग शिविर प्रशासनिक संवेदनशीलता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता का एक बेहतरीन उदाहरण है। कुल 22 में से 8 मामलों का तुरंत निष्पादन और बाकी 14 मामलों पर प्रक्रिया तेज किया जाना यह साबित करता है कि स्थानीय प्रशासन ग्रामीण विकास और जनता की समस्याओं के प्रति पूरी तरह गंभीर है। इस प्रकार के आयोजनों से शासन और जनता के बीच की दूरी कम होती है और लोकतंत्र पर लोगों का विश्वास और अधिक मजबूत हो