बुधवार को लगे कैंप में उमड़े ग्रामीण, मिले कुल 351 आवेदन; मौके पर ही 48 का त्वरित निष्पादन, बारा पंचायत में सबसे अधिक 66 मामलों ने खींचा ध्यान
भागलपुर/पीरपैंती (विशेष संवाददाता): ग्रामीण जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान और शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अभियानों का असर अब धरातल पर साफ दिखने लगा है। इसी कड़ी में भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड क्षेत्र में बुधवार को एक भव्य जन-सहयोग शिविर का आयोजन किया गया। इस विशेष शिविर की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि इसमें उप विकास आयुक्त (DDC) स्वयं मुख्य रूप से मौजूद रहे, जिनकी निगरानी में प्रशासनिक अमले ने पूरी सक्रियता के साथ काम किया। शिविर में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से अपनी समस्याओं का पिटारा लेकर पहुंचे आम नागरिकों से कुल 351 आवेदन प्राप्त हुए। प्रशासनिक तत्परता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनमें से 48 मामलों का मौके पर ही (On-the-spot) सफल निष्पादन कर दिया गया। खास बात यह रही कि इस शिविर में बारा पंचायत से सबसे अधिक 66 आवेदन पहुंचे, जिसने अधिकारियों का विशेष ध्यान अपनी ओर खींचा।
क्या है इस जन-सहयोग शिविर का मुख्य उद्देश्य?
बिहार सरकार और जिला प्रशासन के साझा प्रयासों से आयोजित होने वाले ऐसे सहयोग शिविरों का मूल मंत्र 'जनता के द्वार सरकार' है:
दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति: ग्रामीण अक्सर अपनी छोटी-छोटी शिकायतों, राशन कार्ड, पेंशन या भूमि सुधार से जुड़े कार्यों के लिए प्रखंड और अंचल कार्यालयों के चक्कर काटते-काटते थक जाते हैं। इन शिविरों का मकसद उसी लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया को छोटा करना और राहत को सीधे लोगों तक पहुंचाना है।
शीर्ष अधिकारियों की सीधी मौजूदगी: जब उप विकास आयुक्त जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी खुद शिविर स्थल पर मौजूद रहकर फरियाद सुनते हैं, तो इससे न केवल मामलों के निष्पादन में तेजी आती है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होती है।
बारा पंचायत से आए सर्वाधिक 66 आवेदन: बनी चर्चा का विषय
पीरपैंती के इस मेगा शिविर में यूं तो पूरे प्रखंड से लोग पहुंचे थे, लेकिन एक खास पंचायत ने सभी का ध्यान खींचा:
सबसे आगे रही बारा पंचायत: प्राप्त कुल 351 आवेदनों में से अकेले बारा पंचायत से 66 आवेदन दर्ज किए गए। इतनी बड़ी संख्या में ग्रामीणों का एक साथ अपनी समस्याएं लेकर पहुंचना यह बताता है कि या तो वहां समस्याओं का अंबार है या फिर वहां के लोग अपने अधिकारों के प्रति खासे जागरूक हो चुके हैं।
प्रमुख समस्याएं: बारा पंचायत से आए अधिकांश आवेदन नल-जल योजना की विफलता, इंदिरा आवास (प्रधानमंत्री आवास योजना) की किस्त रुकने, पेंशन योजनाओं में गड़बड़ी और रास्तों पर कीचड़-जलजमाव से जुड़े हुए थे। उप विकास आयुक्त ने बारा पंचायत से आए इन मामलों को विशेष डायरी में नोट करते हुए संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर जांच के निर्देश दिए।
शिविर में प्राप्त विभिन्न विभागों से जुड़े आवेदन
बुधवार को लगे इस शिविर में विभिन्न विभागों के अलग-अलग काउंटर बनाए गए थे, जहां जनता ने अपनी फरियाद दर्ज कराई:
भूमि सुधार और दाखिल-खारिज: जमीन की पैमाइश, म्यूटेशन और आपसी बंटवारे से जुड़े मामलों के कई आवेदन सामने आए, जिन्हें राजस्व अधिकारियों को सौंप दिया गया।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन: वृद्धों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को समय पर पेंशन न मिलने की शिकायतें प्रमुखता से उठीं, जिनका मौके पर ही सत्यापन कर कई मामलों का समाधान किया गया।
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण (राशन कार्ड): नए राशन कार्ड बनवाने और पुराने में नाम जुड़वाने के लिए महिलाओं और परिवारों ने भारी संख्या में आवेदन सौंपे।
मनरेगा और ग्रामीण विकास: गांवों में रोजगार की मांग और अधूरे पड़े विकास कार्यों को पूरा कराने को लेकर भी कई ग्रामीणों ने लिखित शिकायतें दर्ज कराईं।
48 मामलों का ऑन-स्पॉट निष्पादन: राहत की सांस
शिविर का सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि अधिकारियों ने कागजी खानापूर्ति करने के बजाय वास्तविक समाधान पर जोर दिया:
तत्काल राहत: आए हुए 351 आवेदनों में से 48 मामलों का तुरंत ऑन-स्पॉट निस्तारण कर दिया गया। जिन मामलों में छोटे-मोटे कागजात या सत्यापन की औपचारिकता बाकी थी, उन्हें वहीं पूरा कर लाभुकों को हाथों-हाथ प्रमाण पत्र या राहत पहुंचाई गई।
शेष आवेदनों के लिए सख्त निर्देश: बाकी बचे हुए आवेदनों को संबंधित विभागों के सुपुर्द करते हुए उप विकास आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर इन सभी समस्याओं का पारदर्शी तरीके से समाधान किया जाए और इसकी रिपोर्ट जिला मुख्यालय को भेजी जाए।
उप विकास आयुक्त की दो-टूक: "लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी"
शिविर के दौरान उप विकास आयुक्त ने सभी विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ी चेतावनी दी:
जनता की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता: उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा साफ है कि हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। फाइलों को लटकाने या लटकाए रखने की पुरानी संस्कृति अब नहीं चलेगी।
पंचायतवार मॉनिटरिंग: डीसीसी ने अधिकारियों से कहा कि चूंकि बारा पंचायत से सबसे ज्यादा 66 मामले आए हैं, इसलिए विशेष रूप से उस इलाके में जाकर समस्याओं की जमीनी हकीकत की जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि वहां के लोगों को जल्द से जल्द राहत मिले।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया और संतोष का भाव
पीरपैंती के इस विशाल शिविर में पहुंचे आम ग्रामीणों के चेहरे पर राहत और उम्मीद दोनों साफ झलक रही थी:
अधिकारियों के प्रति आभार: शिविर में अपनी समस्या का तुरंत समाधान पाकर लौटे एक स्थानीय ग्रामीण ने कहा, "हम महीनों से ब्लॉक के चक्कर काट रहे थे जो काम यहाँ कुछ ही घंटों में हो गया। अधिकारियों का हमारे बीच आकर हमारी बात सुनना बहुत बड़ी राहत है।"
आगे भी ऐसे शिविरों की मांग: ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से यह मांग की है कि इस तरह के मेगा शिविर हर महीने नियमित अंतराल पर लगाए जाएं ताकि लोगों को अपनी छोटी-छोटी शिकायतों के लिए भटकना न पड़े।
पीरपैंती में उप विकास आयुक्त की उपस्थिति में आयोजित यह जन-सहयोग शिविर प्रशासनिक कुशलता और जनता के प्रति प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। 351 आवेदनों का प्राप्त होना और उसमें से 48 का तुरंत निस्तारण होना यह साबित करता है कि यदि प्रशासन चाहे, तो व्यवस्था को कितना सुगम बनाया जा सकता है। विशेष रूप से बारा पंचायत से आए 66 आवेदनों पर प्रशासन का विशेष फोकस यह उम्मीद जगाता है कि आने वाले दिनों में पीरपैंती के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर और तेजी से सुधरेगी, जिससे आम आदमी का जीवन वाकई आसान और सम्मानित हो सकेगा।