नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के आरोपी को महिला थाना पुलिस ने किया गिरफ्तार, इलाके में सनसनी और आक्रोश का माहौल

भागलपुर: बिहार के सिल्क सिटी भागलपुर में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को चुनौती देती एक बेहद शर्मनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। शहर के एक संवेदनशील इलाके में नाबालिग बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए महिला थाना की पुलिस ने मुख्य आरोपी को धर दबोचा है। इस जघन्य अपराध के प्रकाश में आने के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और आम नागरिकों के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक संगठनों में भी भारी आक्रोश व्याप्त है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर उससे कड़ाई से पूछताछ शुरू कर दी है तथा पोक्सो अधिनियम (POCSO Act) और अन्य गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी शिकंजा कस दिया है।

क्या है पूरा मामला? घटना की पृष्ठभूमि

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह सनसनीखेज घटना पिछले दिनों उस वक्त घटी जब पीड़िता नाबालिग बच्ची अपने घर के आसपास अकेली थी। आरोप है कि शातिर किस्म के दरिंदे ने डरा-धमकाकर या बहला-फुसलाकर बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया। घटना के बाद से डरी-सहमी पीड़िता ने रोते हुए अपनी आपबीती परिजनों को बताई, जिसके बाद परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

परिजनों का पुलिस से संपर्क: इस वीभत्स कृत्य के तुरंत बाद पीड़ित परिवार बिना वक्त गंवाए सीधे महिला थाना पहुंचा और अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई।

गंभीर धाराओं में मामला दर्ज: मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला थाना की प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने तत्काल एक्शन लिया और भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच के विशेष दल (Special Team) का गठन किया।

महिला थाना पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी

मामले की संवेदनशीलता को भांपते हुए भागलपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) और महिला थाना पुलिस ने अपनी सूझबूझ और तकनीकी अनुसंधान का परिचय देते हुए जाल बिछाया।

छापेमारी और दबिश: पुलिस टीमों ने संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की, जिसके परिणामस्वरूप मुख्य आरोपी पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी भागने की फिराक में था, लेकिन समय रहते पुलिस ने उसे दबोच लिया।

मेडिकल जांच और बयान: पुलिस ने पीड़िता को सुरक्षित संरक्षण में लेते हुए उसकी मेडिकल जांच (Medical Examination) कराई है और न्यायालय के समक्ष उसके बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है ताकि मुकदमे को पुख्ता बनाया जा सके।

समाज में आक्रोश और सुरक्षा पर उठते सवाल

इस घटना के सामने आने के बाद भागलपुर के प्रबुद्ध नागरिकों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि समाज में लगातार बढ़ रहे इस तरह के जघन्य अपराध इस बात की गवाही देते हैं कि असामाजिक तत्वों के मन से कानून का खौफ कम हो रहा है।

कड़ी से कड़ी सजा की मांग: महिला संगठनों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मामले में स्पीडी ट्रायल (Speedy Trial) चलाया जाए ताकि आरोपी को कम से कम समय में फांसी या उम्रकैद जैसी मिसाल कायम करने वाली सजा मिल सके।

पुलिस प्रशासन का आश्वासन: इस बीच, भागलपुर पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जा रही है। पुलिस का यह भी कहना है कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए चार्जशीट जल्द से जल्द समर्पित की जाएगी, ताकि अदालत में सुनवाई तेजी से आगे बढ़ सके।